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[Hindi] hindi novels

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Post time: 15-6-2018 10:25:00
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 Author| Post time: 15-6-2018 16:56:54
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Edited by !!!! at 25-6-2018 11:12 PM

Khachchar Aur Aadmi


यशपाल के लेखकीय सरोकारों का 'उत्स सामाजिक, परिवर्तन की उनकी आकांक्षा, वैचारिक प्रतिबद्धता और परिष्कृत न्याय-बुद्धि है । यह आधारभूत प्रस्थान बिन्दु उनके, उपन्यासों में जितनी स्पष्टता के साथ व्यक्त हुए है, उनकी कहानियों में वह ज्यादा ' तरल रूप र में ज्यादा गहराई के साथ कथानक की शिल्प उघैर शैली में न्यस्त होकर आते हैं' । उनकी कहानियों का रचनाकाल चालीस वर्षों में फैला हुआ है । प्रेमचन्द कई जीवनकाल में ही वे कथा-यात्रा  आरम्भ कर चुके थे, यह 'अलग 'बात है कि उनकी कहानियों का प्रकाशन: किंचित विलम्ब से आरम्भ हुआ । कहानीकार के रूप में उनकी विशिष्‍टता यह है कि इन्होंने प्रेमचन्द के प्रभाव, सें. मुक्‍त और अछूते रहतें 'हुए अपनी कहानी-कला का विकास किया उनकी कहानियों में संस्कारगत जड़ता और नए विचारों का द्वन्द्व जितनी प्रखरता के साथ उभरकर .आता है उसने भविष्य के कथाकारों के र - लिए एक नई लीक बनाई, जो आज - तक चली आती है; । वैचारिक- निष्ठा, निषेधों और तर्जनाओं रो मुक्‍त न्याय तथा तर्क की कसौटियों पर खरा जीवन - ये कुछ मूल्‍य हैं जिनके लिए हिन्दी.? कहानी यशपाल की ऋणी है ।'खच्चर और आदमी'' कहानी संग्रह में उनकी ये कहानियाँ शामिल हैं  :  वैष्‍णवी, मक्खी या मकड़ी, उपदेश, कलाकार की आत्‍महत्‍या आदमी या पैसा? जीव दया, चोरी और चोरी, अश्लील !, सत्य का द्वन्द्व तथा खच्चर-अओर .आदमीं ।




         
   
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                                                                                                Zindaginama
‘ज़िन्दगीनामा’ एक ऐसा दिलचस्प उपन्यास है जिसमें न कोई नायक है और न खलनायक। इसमें पंजाब का एक गाँव है जिसमें रहते हैं ज़िन्दादिल, जाँबाज़ लोग...‘ज़िन्दगीनामा’ की कहानी इन्हीं लोगों के साथ बहती है और इन लोगों के साथ ही खेत-खलिहानों, पर्व-त्योहारों, लड़ाई-झगड़ों से गुज़रते हुए सूदखोर, साहूकारों और ग़रीब किसानों के दिलों का जायज़ा लेती है...आदमी और आदमी के बीच फ़र्क़ डालनेवाले क़ानून और ऐसे ही तमाम यथार्थ से गुज़रती हुई यह कहानी भारतीय जीवन-दर्शन को उसकी समग्रता में सहेजते-समझते हुए बढ़ती है और गढ़ती है कथ्य और शिल्प का एक नया प्रतिमान! ‘ज़िन्दगीनामा’ के पन्नों में आपको बादशाह और फ़क़ीर, शहंशाह, दरवेश और किसान एक साथ खेतों की मुँडे़रों पर खड़े मिलेंगे। ‘ज़िन्दगीनामा’ कृष्णा सोबती की विलक्षण भाषा-सामर्थ्य का भी परिचायक है। अपने भाषा संस्कार के घनत्व, जीवन्त प्रांजलता और सम्प्रेषण से कृष्णा सोबती ने हमारे समय के अनेक पेचीदा सच आलोकित किए हैं। ‘ज़िन्दगीनामा’ उनका ऐसा उपन्यास है जिसने हिन्दी के आधुनिक लेखन के प्रति पाठकों का भरोसा पैदा किया! किसी युग में, किसी भी भाषा में एक-दो लेखक ही ऐसे होते हैं जिनकी रचनाएँ साहित्य और समाज में घटना की तरह प्रकट होती हैं... और कहने की आवश्यकता नहीं कि ‘ज़िन्दगीनामा’ की लेखिका ऐसी ही हैं जो अपनी भावात्मक ऊर्जा और कलात्मक उत्तेजना के लिए प्रबुद्ध पाठक वर्ग को लगातार आश्वस्त करती रही हैं।




                 
      
   



लेख की रेखा      (Vimal #20)


  bySurender Mohan Pathak



‘कम्पनी’ के नये सरताज से झूझते, हर पल पनाह मांगते विमल की तरफ एक कानून - वो कानून जिससे वो भागता फिर रहा था - के मुहाफिज ने जब विमल की तरफ दोस्ती का हाथ बढ़ाया तो विमल विश्वास नहीं कर पाया ! कदम कदम पर दुश्मनों से घिरे विमल के लेख में ये एक नया पड़ाव था !











                                

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 Author| Post time: 25-6-2018 21:59:55
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Edited by !!!! at 25-6-2018 11:01 PM



नहीं सुनाता, केवल शांति का निरंतर संगीत सुनाया करता है। सन्तोष । हृदय के समीप होने पर भी दूर है, सुन्दर है, केवल आलस के विश्राम का स्वप्र दिखाता है। परन्तु अकर्मण्य सन्तोप से मेरी पटेगी ? नही । इस समुद्र मे इतना हाहाकार क्यो है ? उँह, ये कोमल पते तो बहुत शीघ्र तितर-वितर हो जाने । (बिछे हुए पत्तो को बैठकर ठीक करती है) यह ली, डालो से छनकर आई हुई किरणें इस समय ठीक मेरी आखो पर पड़ेगी। अब दूसरा स्थान ठीक करूं, बिछावन छाया में करूं । (पत्तों को दूसरी ओर वटोरती है) घड़ी-भर चैन से बैठने में भी झझट है।…
कामायनी एक हिन्दी क्लासिक कविता पुस्तक है जयशंकर प्रसाद द्वारा। यह पहली बार 1937 में प्रकाशित किया गया था।

KamayaniKamayani (Hindi:कामायनी) (1936) is a Hindi epic poem (Mahakavya) by Jaishankar Prasad (1889–1937). It is considered one of the greatest literary works written in modern times in Hindi literature. It also signifies the epitome of Chhayavadi school of Hindi poetry which gained popularity in late 19th and early 20th centuries

Kamayani depicts the interplay of human emotions, thoughts, and actions by taking mythological metaphors. Kamayani has personalities like Manu, Ida and Śraddhā who are found in the Vedas. The great deluge described in the poem has its origin in Satapatha Brahmana. Explaining his metaphorical presentation of Vedic characters, the poet said:
Ida was the sister of the gods, giving consciousness to the entire mankind. For this reason, there is an Ida Karma in the Yagnas. This erudition of Ida created a rift between Shraddha and Manu. Then with the progressive intelligence searching for unbridled pleasures, the impasse was inevitable. This story is so very ancient that metaphor has wonderfully mingled with history. Therefore Manu, Shraddha and Ida while maintaining their historical importance may also express the symbolic import. Manu represents the mind with its faculties of the head and heart and these are again symbolized as Faith (Shraddha) and Intelligence (Ida) respectively. On this data is based the story of Kamayani.
The plot is based on the Vedic story where Manu, the man surviving after the deluge (Pralaya), is emotionless (Bhavanasunya). Manu starts getting involved in various emotions, thoughts and actions. These are sequentially portrayed with Shraddha, Ida, Kilaat and other characters playing their part, contributing in them. The chapters are named after these emotions, thoughts or actions. Some people consider that the sequence of chapters denotes the change of personality in a man's life with age.









किराये के हत्यारे -चन्दर
चन्दर के स्पाई थ्रिलर्स तो अपनी मिसाल आप थे ही, उनके थ्रिलर्स भी लाजवाब थे।
उन्ही की कलम से निकला एक लाजवाब थ्रिलर निशुल्क वाचन के लिए प्रस्तुत  है।
किराये के हत्यारे
























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